बैकस्टेज
पर्दे के पीछे: रोशनी, मौसम और जाँच की बातें
शो कितना आरामदेह लगेगा, यह मंच के पीछे की व्यवस्था पर भी निर्भर करता है। यहाँ स्क्रीन और कमरे की रोशनी, भारत के मौसम की छोटी सावधानियाँ और वे संकेत हैं जिन पर अभ्यास नहीं, जाँच की ज़रूरत होती है।
लाइटिंग प्लॉट
डेस्क को मंच की तरह सजाइए
थिएटर में हर बत्ती की जगह पहले से तय होती है। काम की मेज़ पर भी पाँच छोटे संकेत चमक और थकान को कम महसूस कराने में मदद कर सकते हैं।
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खिड़की बगल में
खिड़की स्क्रीन के ठीक पीछे या ठीक सामने हो, तो चमक और परछाईं दोनों बढ़ती हैं। मेज़ को ऐसे घुमाएँ कि दिन की रोशनी किनारे से आए; दोपहर की धूप में पर्दा आधा खींच दें।
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स्क्रीन एक हाथ दूर
मॉनिटर लगभग एक हाथ की दूरी पर, और उसका ऊपरी किनारा आँखों की सीध पर या उससे थोड़ा नीचे। लैपटॉप हो तो उसे किताबों पर रखकर अलग कीबोर्ड लगाना एक आसान उपाय है।
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लैंप कागज़ पर, स्क्रीन पर नहीं
टेबल लैंप की रोशनी नोटबुक या किताब पर गिरे, पर स्क्रीन पर उसकी चमक न दिखे। लैंप को काम करने वाले हाथ के उलट तरफ़ रखने से परछाईं कम बनती है।
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कमरे की बत्ती जली रहे
पूरा अँधेरा और सिर्फ़ चमकती स्क्रीन, यह जोड़ आँखों के लिए कड़ा लगता है। रात में भी कमरे में हल्की, फैली हुई रोशनी रखें।
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स्क्रीन की चमक कमरे जैसी
स्क्रीन कमरे से बहुत तेज़ या बहुत धुँधली न हो। अक्षर का आकार बढ़ाना, आगे झुककर पढ़ने से बेहतर है। रात में गर्म रंग वाली सेटिंग कुछ लोगों को आरामदेह लगती है।
क्यू-शीट
मौसम बदले, तो मंच की व्यवस्था भी
भारत में एक ही साल में तेज़ गर्मी, बारिश, धुंध और त्योहारों का धुआँ सब आता है। हर मौसम की अपनी छोटी सावधानी है।
| स्थिति | शांत आदत |
|---|---|
| गर्मी की तेज़ धूप अप्रैल से जून की दोपहर |
बाहर निकलते समय टोपी या छाता और UV सुरक्षा वाला धूप का चश्मा। पानी पीते रहें; तेज़ धूप में आँखें सिकोड़कर देर तक पढ़ने से बचें। |
| मानसून की नमी जुलाई से सितंबर |
तौलिया, रूमाल, काजल या आई-मेकअप साझा न करें। आँख लाल हो, चिपचिपी लगे या स्राव हो, तो ख़ुद से ड्रॉप न डालें, जाँच करवाएँ। |
| धूल, धुआँ और स्मॉग शहरों में, ख़ासकर सर्दियों में |
बाहर से लौटकर हाथ और चेहरा धोएँ, आँखें न मलें। बाइक पर हों तो चश्मा या हेलमेट का वाइज़र मदद करता है। |
| एसी और कूलर दफ़्तर, घर, लंबी यात्रा |
ठंडी हवा का झोंका सीधे चेहरे पर न आए, इसका ध्यान रखें। पलक-ठहराव और पानी, दोनों को याद रखें। |
| दिवाली के पटाखे अक्टूबर–नवंबर |
सुरक्षित दूरी, बच्चों पर लगातार नज़र, और पटाखे जलाते समय चेहरा न झुकाएँ। आँख में चोट या चिंगारी लगे, तो मलें नहीं, तुरंत 112 या अस्पताल। |
| होली के रंग फ़रवरी–मार्च |
आँख में रंग चला जाए तो साफ़, सामान्य पानी से धीरे धोएँ। जलन या धुंधलापन बना रहे, तो उसी दिन डॉक्टर को दिखाएँ। |
निकास का रास्ता
कब अभ्यास छोड़कर नेत्र-विशेषज्ञ के पास जाएँ
हॉल में निकास का संकेत हमेशा जलता रहता है। ये संकेत भी वैसे ही हैं: इन्हें देखकर इंतज़ार न करें। यह सूची निदान नहीं है, केवल सामान्य दिशा है।
तुरंत · आज ही
- एक या दोनों आँखों की नज़र अचानक कम होना या चले जाना।
- आँख में चोट, रसायन या कोई नुकीली चीज़ लगना।
- आँख में तेज़ दर्द, साथ में सिरदर्द या उल्टी जैसा लगना।
- अचानक बहुत सारे तैरते धब्बे, चमक या आँख के आगे पर्दा-सा आना।
आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल जाएँ।
जल्द · जाँच का समय तय करें
- आराम और नींद के बाद भी धुंधलापन बना रहना।
- पढ़ते या स्क्रीन देखते समय बार-बार सिरदर्द।
- लालिमा, चिपचिपापन या स्राव जो कुछ दिन में न जाए।
- रोशनी से असामान्य चुभन, या एक चीज़ दो दिखना।
- बच्चे का बहुत पास से देखना, आँखें सिकोड़ना या बार-बार आँखें मलना।
प्रॉम्प्टर के नोट्स
जाँच के दिन क्या साथ ले जाएँ और क्या पूछें
मंच के किनारे बैठा प्रॉम्प्टर याद दिलाता है कि कौन-सी पंक्ति छूट न जाए। जाँच से पहले लिखी छोटी पर्ची भी वही काम करती है।
साथ रखें
- अभी का चश्मा, और लेंस पहनते हों तो उसका डिब्बा
- चल रही दवाओं की सूची
- पुरानी पर्चियाँ या जाँच की रिपोर्ट
बताएँ
- परेशानी कब से है और दिन के किस समय ज़्यादा
- रोज़ कितने घंटे स्क्रीन, किस दूरी पर
- परिवार में कोई नेत्र-रोग हो तो
पूछें
- मेरे लिए अगली जाँच कितने समय बाद ठीक रहेगी?
- क्या स्क्रीन के काम के लिए अलग चश्मे की ज़रूरत है?
- इंटरवल अभ्यासों में से कोई मेरे लिए ठीक न हो, तो कौन-सा?